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Showing posts from August, 2019

गणपति बाप्पा मोरिया ।। क्या है? "मोरिया" का मतलब ।।

गणपति बप्पा मोरिया।। क्या है?
                             "मोरिया" का मतलब।।

मोर गांव का समूचा क्षेत्रों में मोरों के समृद्ध था। इसलिए इस गांव का नाम मोरगांव पड़ा हां और यहां गणेश की सिद्ध प्रतिमा थी जिसे मयूरेश्वर कहां जाता है इसके अलावा राजन गांव, ओझर, सिद्धटेक, मोहड़ ,पाली और लेन्यंद्री यह सात स्थान और भी है। जहां गणेश प्रतिमाओं की पूजा होती है।

गणेश पुराण में दिया गया है। कि दानव सिंधु के अत्याचार से बचने हेतु देवताओं ने गणेश का आव्हान किया था। उस समय गणेश ने सिंधु सोमवार के लिए मयूर को अपना वाहन बनाया। और 6 भुजाओं वाला अवतार लिया था। मोर गांव में गणेश का वही मयूरेश्वर अवतार है। इसलिए मराठी में ही से मोरेश्वर कहा जाता है। वामन भट्ट और पार्वती को मयूरेश्वर की आराधना से ही पुत्र प्राप्ति हुई और परंपरा से उन्होंने आराध्य के नाम पर यह संतान का नाम मोरिया दिया ।

मोरिया बचपन से ही श्री गणेश भक्त थे मोरिया ने थेऊर में जाकर तपस्या की जिसके बाद उन्हें सिद्ध अवस्था में गणेश की अनुभूति हुई। तभी से उन्हें मोरिया अर्थात मोरया गोसावी की प्रसिद्धि मिली थी। उन्हो…

गणपती बाप्पा मोरिया।। क्या है? "मोरिया" का मतलब ।।

गणपति बप्पा मोरिया 
                          क्या है? मोरिया का मतलब!!

           गणेश चतुर्थी आते ही इन दिनों जोर शोरों से चारों तरफ एक ही जयकारा गूंजता है।" गणपति बप्पा मोरिया" मोरिया रे बप्पा मोरिया रे .....
लेकिन क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है। कि यह 'मोरिया' का मतलब क्या है? इसका मतलब मौर्य या मोर है।या फिर गणपति का नाम है मोरिया। जी नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। बल्कि मोरिया शब्द का इतिहास कुछ और ही है। तो चलिए आज हम जानते हैं। वह इतिहास जो आज तक हमने नहीं जाना।

           गणपति बप्पा मोरिया पुढच्या वर्षी लवकर या ।।
           मंगल मूर्ति मोरिया अगले बरस जल्दी आ ।।
अर्थात हे मंगलकारी पिता अगली बार तू जल्दी आना। महाराष्ट्र में बप्पा के विसर्जन के दिन कहां जाता है।
         एक लड्डू फूटला नी गणपति बप्पा उठला।।
इस जयकारा के साथ गणपति बप्पा को विदा किया जाता है।

         कहां जाता है कि 14 वी सदी में चिंचवड जो पुणे के पास स्थित है। वहां एक गणेश भक्त रहते थे। जिनका नाम मोरया गोसावी था। मोरया गोसावी ने चिंचवड में कठोर गणेश साधना की थी। ए भी कहा जाता है कि मोरया गो…

हरितालिका को तिजा कहते हैं।

हरतालिका व्रत कथा।।

             हरतालिका व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष तृतीया को हस्त नक्षत्र के दिन रखा जाता है। इस दिन कुंवारी कन्या और सौभाग्यवती स्त्रियां उपवास रखकर गौरी शंकर की पूजा करती है। इस व्रत को हरतालिका तीज या तीजा भी कहते हैं। इस वर्ष 2019 में 1 सितंबर रविवार को शुभ मुहूर्त सुबह 5:27 से 7:52 और प्रदोष काल पूजा मुहूर्त शाम 17:50 से 20:09 तक है।

व्रत कथा।।

              माता पार्वती ने अपने पूर्व जन्मों में शंकर भगवान को पति के रूप में पाने के लिए हिमालय के गंगा तट पर अपनी बाल्यावस्था में ही अधोमुखी होकर और कब किया यह कठोर तप में माता पार्वती ने कई साल सूखे पत्ते चबाकर तो कई सालों तक केवल हवा पीकर ही जीवन व्यतीत किया था यह देख माता पार्वती के पिता बहुत दुखी हुई है।

                इसी दौरान महर्षि नारद ने भगवान विष्णु की ओर से पार्वती के लिए विवाह का प्रस्ताव लेकर माता पार्वती के पिता के पास पहुंचे। तो माता पार्वती के पिता ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। बाद में जब पार्वती के पिता ने पार्वती के विवाह की बात बताई तो मां पार्वती दुखी हुई और जोर जोर से रोने लगी।

        …

पोला क्यू? मनाते हैं।।

  पोला क्यों? मानाते है।
                               ।। इतिहास ।।

          हमारा भारत देश कृषि प्रधान देश है। और कृषि को बेहतर सफल बनाने में मवेशीयों का विशेष योगदान रहता है। और इसी वजह से हमारे भारत देश में मवेशियों की पूजा की जाती है। भारत देश में मुख्य त्योहार में से एक पोला का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन क्रूषक अपने गाय, बैलों की पूजा करते हैं। विशेष रूप से इस दिन बैलों की पूजा करते हैं।

           पोला को 'बैल पोला' भी कहा जाता है। और यह पोला का त्यौहार खासकर छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।

           पोला भादो मास की अमावस्या को मनाया जाता है। जिसे पिठोरी अमावस्या कहते हैं। वर्ष 2019 में 30 अगस्त को मनाया जाएगा। महाराष्ट्र में इस त्यौहार की बड़ी धूम रहती है। इस त्यौहार को 2 दिन मनाते हैं। पहले दिन को मोठा पोला तो दूसरे दिन को तन्हा पोला कहते हैं।



"पोला" त्यौहार का इतिहास 

            कृष्णा के अवतार में जब विष्णु भगवान ने जन्म लिया था। उस दिन को कृष्णा जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। तब कृष्णा के मामा कंस, कृष्ण…

अंधा प्यार (पार्ट-2)

    अंधा प्यार।।

           वीणा, राजू के पास पहुंची उसे लगा राजू मर चुका है। वह राजू के सीने पर सर रखकर रोने लगी। वह फूट-फूटकर रो रही थी। उसे रोता देख उसकी बहन भी दौड़ते उसके पास आई और विना को संभालने की कोशिश करने लगी। पर बिना सोचने समझने की ताकत खो चुकी थी। वह जोर-जोर से चिल्ला कर रोने लगी उसका सब कुछ खो चुका था। उसने अपना प्यार खोया था।

           तभी राजू की धड़कन चलने की आवाज बिना के कानों तक आई। वीना उठ खड़ी हुई और लोगों से हाथ जोड़कर मदत (हेल्प) मांगी। और राजू को अस्पताल पहुंचाया गया। 2 घंटे के ऑपरेशन के बाद डॉक्टर बाहर आए। डॉक्टर को ऑपरेशन थिएटर से निकलते देख बिना उनकी और लपकी और दोनों हाथ जोड़कर रोती हुई डॉक्टर के सामने जा खड़ी हुई।

             तब डॉक्टर ने बीना से कहा "राजू अब खतरे से बाहर है।" बिना खुश हुई। कि अब उसका प्यार बच गया। वो राजू से मिलना चाहि। पर राजू बेहोश था इसलिए डॉक्टर ने मिलने से मना कर दिया।



             दूसरे दिन जब राजू को होश आया तो बिना उसके सामने उसके पास खड़ी थी। बिना राजू से बोली तुमने ऐसा क्यू किया? क्या तुम मुझे इतना प्यार करते हो। जो म…

अंधा प्यार ।।

अंधा प्यार ।।

        अंधा प्यार हो। या प्यार में अंधा। बात तो एक ही है। लोग न जाने प्यार में क्या? क्या? कर बैठे हैं। यह ऐसी ही एक अंधी लड़की की प्रेम कहानी।

        बिना अपनी मां बाप की दूसरी संतान थी। एक एक्सीडेंट के दौरान वीना की आंखों की रोशनी चली गई थी। तब से बहुत दुखी रहती थी। कोई खास उसके दोस्त भी नहीं थे। केवल एक दोस्त था जिसका नाम राजू था। राजू उसका बहुत अच्छा और करीबी दोस्त था। वह हर समय उसे उसके साथ रहता। और दुनिया अपनी आंखों से दिखाता।

        राजू, वीणा को बहुत पसंद करता था। मन ही मन उसे चाहता था। इसीलिए वह ज्यादा वक्त विना के साथ गुजरता। बिना अंधी होने के कारण वह ज्यादा कहीं आती जाती नहीं थी। और किसी से ज्यादा मिलती भी नहीं थी। वह बहुत दुखी रहती थी। उसे दुख होता था कि वह अंधी है।

       राजू ने 1 दिन बिना से कहा मैं तुझे बहुत चाहता हूं। क्या तुम मुझसे शादी करोगी। बिना मन ही मन राजू को पसंद करती थी। लेकिन उसके प्यार को वह स्वीकार नहीं कर पाई वह सोचती थी। कि वो अंधी है इसलिए राजू उस पर दया दिखाता है। और जहां दया है वहां प्यार नहीं होता। और फिर मैं राजू पर बोझ कैसे बन सकती…

श्री कृष्ण के नाम और अर्थ ।।

 श्री कृष्ण के नाम और अर्थ।।
              Krishna Name's And Meaning

         कृष्णा : सबको मोह लेने वाला।
      मुरलीधर : मुरली वाला।
      मधुसूदन : मधु दैत्य का वध करने वाला।           
पीतांबर धारी : पीला वस्त्र धारण करने वाला।
 गिरिधर:गिरी : गोवर्धन पर्वत को उठाने वाला।
   देवकीनंदन : देवकी का पुत्र।
  बाल गोपाल : पृथ्वी का पालन करने वाला।
          गोविंद : गौओ का रक्षक।
    आनंद कंद : आनंदमय राशि वाला आनंद।
  कुंज बिहारी : कुंज नाम के गलियों में रहने वाला।
           श्याम : सावला।
          माधव : माया के स्वामी।
           मुरारी : मुर दैत्य के स्वामी।
        चक्रधरी : सुदर्शन चक्र या शक्ति चक्र को धारण करने                               वाला।
       असुरारी : असुरों के शत्रु।
           मुकुंद : निधियों से चलने वाला।


         बनवारी : वन में रहने वाला।
         योगेश्वर : योगियों का ईशवर।
           गोपेश :  गोपियों के साथ रहने वाला।
             मदन : सुंदर। 
            मोहन : सबका मन जीतने वाला।
          मनोहर : मन को हरने वाला।
       पालनहार : सबका पालन पोषण करने…

दही हांडी की परम्परा ।।

 दही हांडी क्यों? मनाते हैं लोग

हिंदू मान्यताओं मैं परंपराओं का बहुत महत्व है। विष्णु भगवान के अवतार श्री कृष्णा के जन्म की खुशियों के तौर पर सालों से आ रही है। यह परंपरा हर साल भाद्र मास की अष्टमी तिथि में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है।

 श्री कृष्णा के बाल्यावस्था की बाल लीलाओं को समर्पित एक उत्सव के रूप में दही हांडी का उत्सव महाराष्ट्र और गुजरात में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। और अब बदलते वक्त के साथ यह दही हांडी का उत्सव केवल हमारे देश में ही नहीं बल्कि विदेश के अन्य क्षेत्रों में भी मशहूर हो चुका है।

 दही हांडी का उत्सव हर साल जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाता है। और वर्ष 2019 को 25 अगस्त को दही हांडी का उत्सव मनाया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार श्री कृष्णा के जन्म की खुशी में अगले दिन दही हांडी का उत्सव मनाने की यह परंपरा बन गई है।
 इसमें ज्यादा संख्या में लड़के उपस्थित रहते हैं। और लड़के एक के ऊपर एक चढ़ते जाते हैं। जिससे एक श्रृंखला सा बन जाता है। और "ह्यूमन पिरामिड" की तरह बनाते हुए। ऊंचाई तक पहुंचते हैं। इतनी ऊंचाई तक पहुंचना पड़ता है। जितनी ऊंचाई पर वह दही…

कृष्ण जन्माष्टमी

पौराणिक कथा
                          श्री कृष्ण के जन्म की ।।

कृष्णा का जन्म उत्सव का दिन जन्माष्टमी के रूप में स देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।

         आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा की काल कोठरी (कारागृह) में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से श्री कृष्णा ने जन्म लिया था।

         वर्ष 2019 में जन्माष्टमी का पर्व 24 अगस्त दिन शनिवार को मनाया जाएगा। कृष्णा जन्माष्टमी को पूजा करने का शुभ मुहूर्त है।

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:55 बजे तक जन्माष्टमी निशिथ पूजा का समय है।
                 मध्य रात्रि 12:09 से 12:47 बजे तक
               पूजा के शुभ मुहूर्त की अवधि 38 मिनट है।


भगवान श्री कृष्णा जन्माष्टमी की।

द्वापर युग में एक उग्रसेन नामक राजा रहता था। जो मथुरा में राज्य करता था। उसके पुत्र कंस ने अपने आताताई से उसे गद्दी से उतार दिया। और स्वयं मथुरा का राजा बना कंस को एक बहन थी जिसका नाम देवकी था। उसका विवाह एक यदुवंशी के सरदार वसुदेव से हुआ।

एक बार कंश, देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था।…

एक अनोखी Love Story

Love Story

मैंने, मेरे दोस्त राकेश की पूरी बात सुनी और फिर उसे समझाया। वो बेवफा हरगिज़ नहीं है। उसने प्यार किया अपने पति से और फिर प्यार किया तुमसे। उसने जीवन को गहराई से देखा। सोचा। और फैसला लिया। अगर वह तुझ से शादी करती है। तो वह अपाहिज पति बेसहारा होगा। और उसे उसने जीवन भर का सहारा दिया। रही बात तुम्हारी तो तुम इस लायक हो कि तुम्हें कोई भी लड़की अपना लेंगी। मतलब तुम्हें भी सहारा मिलेगा।

उसकी ज्यादा जरूरत उसके पति को हो थी। और उसने साथ में समाज के तानों से बचने के लिए। यह कदम उठाया। और तुम से मां बनने का सौभाग्य प्राप्त कर तुम्हें अपनी सच्चाई बता दी। अब तू सोच की तेरा प्यार कितना महान और अच्छा है। जो त्याग करने से भी पीछे नही रहा।

और उसने तुम्हें एक अच्छा इंसान समझ कर प्यार किया। और तू अपने आप को शराब में डुबो रहा है। जब उसे पता चलेगा। कि तूने इस तरह अपनी जिंदगी को बर्बाद किया तो क्या वह सुख से जी पाएगी। तू उसके जीवन में और मुश्किलें क्यों पैदा कर रहा है। उसे उसका जीवन सरल बनाने में मदद करनी चाहिए। तुझे तो गर्व होना चाहिए। कि तूने जिस लड़की से प्यार किया। वह एक त्याग की मूरत है।

  अब रा…

एक अनोखी प्रेम कहानी

 एक अनोखी Love Story

मैं घर मालक से उसके बारे में पूछा तो उन्होंने जो बताया। उसे सुनकर मेरे होश उड़ गए। मेरे पैरों के नीचे से जमीन ही खिसक गई। वह ऐसा कैसे कर सकती है। अचानक बिना कुछ बताए बिना कुछ कहे वह मुझे छोड़ कर कैसे जा सकती थी।

            हां वह तो मुझे छोड़कर मेरी दुनिया से जा चुकी थी ।उसने अपना तबादला करा लिया था। वह हमेशा के लिए मुझे छोड़ कर जा चुकी थी। और तो और अपना नाम पता या अपने बारे में कुछ भी बताने के लिए घर माल आपको मना किया था। मैं घुटने टेककर दहाड़ लगा कर रोने लगा। बहुत रोया फिर घरवालों ने मुझे समझाते हुए। मेरे हाथ में एक लिटर देते हुए कहा।

           जाते जाते यह पत्र दे गई तुम्हारे नाम। मैं वहां से उठा  और अपने घर लौट आया। सोचा मेरे लिए कुछ खास लिखा हो। मुझे अपने घर बुलाया हो। इसलिए मैं घर पहुंचते ही पत्र खोला और पढ़ने लगा।

           प्रिय,
                मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूं। पर आई लव यू नहीं कह सकती। तुम मेरे लिए बहुत मायने रखते हो। मेरे जीवन का वह हिस्सा हो जिसे मैं अपनी जिंदगी में मरते दम तक भूल नहीं पाऊंगी। और फिर तुमने मुझे वह खुशी दी है। एक ऐसा अ…

एक अनोखी प्रेम कहानी ।।

एक अनोखी * Love Story *

होली का त्यौहार था। धुलीवंदन के दिन मेंने, दोस्तों के साथ बैठकर थोड़ी सी पी ली थी। वह दिन ही ऐसा था। कि मैं मना नहीं कर पाया। फिर हम सब ने होली खेली बाद में उन्हें अलविदा कह कर। मैं अपने घर के लिए निकला घर पहुंच कर जैसे-तैसे गाड़ी गेट के बाहर ही रखी। मुझे नशा चढ़ा था। मैं अपने नशे में ही लड़खड़ाते हुए।

            उसके रूम की और चल पड़ा। उसे रंग भी तो लगाना था। रास्ते भर मैं यही सोचता हुआ आ रहा था। कि आज मुझे किसी भी तरह उसे अपने प्यार की बात करनी है। मैं अपने नशे में चला उसके रूम के सामने था। डोरबेल बजाई घंटी की आवाज सुनकर वह दौड़ते आई दरवाजा खोलने। शायद वह भी मेरा ही इंतजार कर रही थी।

मैं अंदर गया और उसे रंग लगाते हुए। होली की शुभकामनाएं दी। उसने भी मुझे रंग लगाया। फिर मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। और उसे चूमता ही गया। चूमते चूमते पता नहीं कितनी बार मैंने उसे आई लव यू कहा था। मैंने उसे इस तरह पकड़ लिया कि। वह मुझसे अपने आप को छुड़ा ही नहीं पाई। और वह मेरी आगोश में आ गई।

             मैं शराब की नशे मैं तो था। ही पर इस वक्त उसकी प्यार के नशे में डुबकी लगा रहा …

एक अनोखी प्रेम कहानी ।।

।।  एक अनोखी प्रेम कहानी ।।

मुझे पता चला कि मेरा दोस्त राकेश घर आया है। तो मैं उसे मिलने उसके घर गया। तो अंकल, राकेश के पापा मुझे घर के बाहर ही मिले। मैंने अंकल को नमस्ते बोला और राकेश के बारे में पूछने लगा अंकल राकेश 8 दिन से घर आया है। और वह मुझे एक बार भी मिलने नहीं आया। तो मैं ही उसे मिलने चला आया कहां है वह।

          अंकल बोले बेटा, मैं क्या बताऊं राकेश जब से दिल्ली से लौता है। तब से खुद को एक कमरे में बंद कर रखा है। और लगातार शराब पी रहा है। ऐसे लगता है। जैसे उसने खुद को शराब में डुबो दिया है। मेरे बार-बार पूछने पर भी वह कुछ नहीं बता रहा है। आखिर किस बात का दुख है उसे पता नहीं। आज तक कभी उसने ऐसा नहीं किया है। मुझे बहुत चिंता हो रही है। ना किसी से बात करता है। ना किसी को मिलता है। ना मुझे कुछ बताता है।

         राकेश और तुम बचपन से साथ रहे हो। तुम दोनों अच्छे दोस्त हो। हो सकता है कि वह तुम्हें अपने दिल की बात बता दे। तुम उसे मिलकर उसके दुख का कारण जरूर  पूछना और मुझे बताना। मैं अपने बेटे को इस हालत में नहीं देख सकता। मैंने कहा। हां अंकल जरूर...

        और फिर मैं राकेश कि रूम में ग…

राखी का त्यौहार सावन पूर्णिमा को ही क्यों मनाते हैं।

 राखी का त्यौहार सावन पूर्णिमा को ही क्यों मनाते हैं।

    1:-   रक्षाबंधन राखी का त्यौहार यह श्रावणी उत्सव है । इस दिन कलाई में रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है । इसका जिक्र धर्म ग्रंथों में दिया है ।  इस दिन शिष्य अपने गुरुओं को रक्षा सूत्र बांधा करते थे लेकिन इस श्रावणी त्यौहार इस परंपरा की शुरुआत कैसे हुई और भाई बहनों का त्यौहार बना इस की रोचक कहानियां।
        भविष्य पुराण में उल्लेख किया गया है कि सतयुग में यह असुर हुआ करता था । जिसका नाम वृत्रासुर था उसने अपने साहस और पराक्रम के बल पर देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अपना हक अधिकार बना लिया ।  वृत्रासुर ने यह वरदान प्राप्त किया था कि वह किसी भी अस्त्र या शस्त्र से पराजित नहीं होगा।
         यही कारण था कि देवराज इंद्र बार-बार वृत्रासुर  से पराजित होते थे । तभी महर्षि दधीचि ने अपने शरीर का परित्याग करके अपनी हड्डियों से इंद्र का अस्त्र वज्र बनाया इसके बाद देवराज इंद्र अपने गुरु बृहस्पति के पास गए और उन्हें बताया कि वृत्रासुर से युद्ध करने जा रहे हैं।
         यदि वह युद्ध में विजई हुए तो ठीक अन्यथा वीरगति को प…

घोसला ( पार्ट-5)

 घोसला ( पार्ट-5 )

 मुझे अपनी फिक्र नहीं थी। मुझे चिंता थी मेरी बेटियों की। मेरे बाद मेरी बेटियों का कोई अपना नहीं था। क्या करेंगी। कैसी रहेगी। उनकी देखभाल कौन करेगा? मैं किसके भरोसे अपने बच्चे छोड़ जाऊं। मेरे पति ने अब तक हमारी कोई खबर ही नहीं ली थी। तो उनका सवाल ही नहीं उठता था जिस व्यक्ति ने बेरहमी से हमें घर से निकाला वह अब अपना ले यह उम्मीद भी नहीं कर सकती।

मैं क्या करूं मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। रात दिन सोच- सोच कर मर रही थी। मुझे बच्चों के लिए कोई ठोस कदम तो उठाना ही था। जिससे मेरे मरने के बाद मेरे बच्चे सुरक्षित रहे। आखिर उनके भविष्य की बात थी। मेरे दिमाग में एक बात आई और मैंने अपने कलेजे पर पत्थर रखकर एक फैसला लिया।

 दूसरे दिन मैंने भैया- भाभी को घर बुलाया। और उन्हें कहा "भैया, मैं अब कुछ ही दिनों की मेहमान हूं। मेरे बाद कोई है। नहीं जो मेरी बच्चियों का ख्याल रखें। यदि कोई ऐसा परिवार मिल जाए। जिन को अपनी अवलाद नहीं हो। और वह किसी बच्चे को गोद लेना चाहते हो। मैं अपनी बेटियां उन्हें गोद दूंगी। ताकि मेरे बाद मेरी बच्चियों को सहारा मिल जाए।"

 " मेरे मरने से पहल…

घोसला (पार्ट-4)

घोसला (पार्ट-4)

           मैं अब घर घर जाकर झाड़ू ,पोछा,बर्तन, कपड़े धोने का काम करने लगी। बच्चों को साथ लेकर जाती थी। वह मेरे सामने खेलते और मैं अपना काम करती। भैया- भाभी के छत्रछाया में 1 साल निकल चुका था। पर अब तक मेरे पति ने हमारी कोई खबर नहीं ली थी। भैया- भाभी ने अपने पास ही एक रूम मुझे किराए पर दिला दी थी। मेरी बेटी अब 6 साल की हुई। तो उसका स्कूल में दाखिला करा दिया। बड़ी बेटी स्कूल जाती और दूसरी छोटी थी। तो उसे अपने साथ रखती थी। अब यही मेरा जीवन था। मेरा ख्वाब टूट कर बिखर चुका था और हकीकत यही थी। धीरे-धीरे ऐसे ही चलता रहा। और दिन, महीने, साल बीतने लगे।

     फिर 1 दिन किसी ने मुझे एक ऑफर दिया। महीने की अच्छी मोटी तनख्वाह थी। मुझे एक बड़े घर में काम मिला था। एक बड़ा बिल्डर्स था। जो इन दिनों टीवी जैसे संक्रमण से संक्रमित था। जो मौत और जिंदगी से लौट रहा था। मुझे उसके देखभाल करने का काम दिया गया था। तनखा अच्छी थी और फिर कभी इससे अच्छा अवसर मिले ना मिले। जिससे मैं अच्छा कमा सकूं। बेटियों के लिए कुछ बचत भी जरूरी थी। यही सोच कर मैंने इस काम के लिए हां कर दी। अब मैं रोज वहां जाने लगी और …

घोसला (पार्ट-3)

घोसला (पार्ट-3) 

      एक दिन मेरे ससुराल वालों ने मुझे, मेरी बेटियों के साथ घर से बाहर निकाला। मैं और मेरी बेटियां हम रात भर घर से बाहर दरवाजे पर ही पड़े रहे। मुझे लगा मेरी नहीं तो कम से कम मेरी बेटियों की दया कर। मुझ पर रहम करेंगे। लेकिन बेटे की चाहत में ए लोग पुरी तरह से निर्दय हो चुके थे। इन लोगों ने मेरी नन्ही सी बेटियों की भी परवाह नहीं कि। मैंने अपने सपने में भी नहीं सोची थी। कि कभी मेरे साथ ऐसा भी हो सकता है।

अब मैं कहां? जाऊं मेरी समझ में नहीं आ रहा था। मेरे, माता-पिता के लिए। मैं मर चुकी थी। उन लोगों ने कभी पलटकर मेरी कोई खबर नहीं ली थी। मेरी एक बेटी 5 साल की और दूसरी बेटी 2 साल की थी। इन बच्चो को लेकर मैं कहां? जाऊं दिमाग में इस सवाल ने उठल- पुथल मचा रखा था।

           दूसरी सुबह जब हमें पड़ोसियों ने घर के बाहर देखा। तो वहां मोहल्ले वाले जमा हुए। सब पूछने लगे क्या? हुआ तो आवाज सुनकर घर के अंदर से मेरे सास-ससुर और प्रशांत मेरे पति बाहर आए। अब मुझे लगा कि लोगों के सवालों का जवाब ना देते हुए। अपनी मान, प्रतिष्ठा का लिहाज रखते हुए। मुझे घर बुला लेंगे। पर ऐसा नहीं हुआ। इन लोगों ने…

' घोसला ' पार्ट-2

  ' घोसला '  पार्ट-2

हम दोनों ने मंदिर जाकर शादी कर ली। मैं उनके साथ उनके घर गई। वहां पर मेरा खुशियों से स्वागत किया गया। जैसे एक बहु का गृह प्रवेश होना चाहिए। वैसा ही मेरा गृहप्रवेश कराया गया। प्रशांत अपने मा-बाप की इकलौती संतान थी। उन्होंने बेटे की पसंद को खुशी से स्वीकार कर लिया।

   मैं बहुत खुश थी। मेरे सास-ससुर बेटी की तरह मेरा ख्याल रखते थे। हम दोनों अपनी गृहस्थी बसा कर बहुत खुश थे। बस मुझे दुख होता था। जब मेरे मम्मी- पापा की याद आती तब। मैं उनसे मिलने जा भी नहीं सकती थी। मैं उनके लिए उसी दिन मर गई थी। जब मैं अपने घर से भागी थी। बाकी मेरे जीवन में खुशियां ऐसी थी। कि मानो भगवान् ने छप्पर फाड़कर मेरी झोली में खुशियां भर दी हो।

देखते ही देखते 1 साल कैसे बिता मुझे पता ही नहीं चला। सास- ससुर और पति के प्यार में दिन, महीने कैसे निकले मुझे पता नहीं लगा। इस दौरान मैं पेट से रही। इस खबर ने घर की खुशियां दोगुनी कर दी। कुछ महीने बाद मेरी गोद भराई की गई। तब मैंने मेरे मम्मी- पापा को बूलावा (नेवता) भेजा लेकिन वह नहीं आए। उन्होंने अभी तक मुझे माफ नहीं किया था।

 मेरी डिलीवरी का समय जैसे-ज…