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राखी का त्यौहार सावन पूर्णिमा को ही क्यों मनाते हैं।


     राखी का त्यौहार सावन पूर्णिमा को ही क्यों मनाते हैं।

    1:-   रक्षाबंधन राखी का त्यौहार यह श्रावणी उत्सव है । इस दिन कलाई में रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है । इसका जिक्र धर्म ग्रंथों में दिया है ।  इस दिन शिष्य अपने गुरुओं को रक्षा सूत्र बांधा करते थे लेकिन इस श्रावणी त्यौहार इस परंपरा की शुरुआत कैसे हुई और भाई बहनों का त्यौहार बना इस की रोचक कहानियां।
        भविष्य पुराण में उल्लेख किया गया है कि सतयुग में यह असुर हुआ करता था । जिसका नाम वृत्रासुर था उसने अपने साहस और पराक्रम के बल पर देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अपना हक अधिकार बना लिया ।  वृत्रासुर ने यह वरदान प्राप्त किया था कि वह किसी भी अस्त्र या शस्त्र से पराजित नहीं होगा।
         यही कारण था कि देवराज इंद्र बार-बार वृत्रासुर  से पराजित होते थे । तभी महर्षि दधीचि ने अपने शरीर का परित्याग करके अपनी हड्डियों से इंद्र का अस्त्र वज्र बनाया इसके बाद देवराज इंद्र अपने गुरु बृहस्पति के पास गए और उन्हें बताया कि वृत्रासुर से युद्ध करने जा रहे हैं।
         यदि वह युद्ध में विजई हुए तो ठीक अन्यथा वीरगति को प्राप्त होकर जरूर लौटेंगे । यह पूरी बात सुनकर देवराज इंद्र की पत्नी देवी सची अपने तपोबल से अभिमंत्रित करके यह रक्षा सूत्र बनाया और देवराज इंद्र की कलाई पर बांधा । जिस दिन सचि ने इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था वह दिन था श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन।
           उस दिन देवराज इंद्र युद्ध में विजई होकर लौटे और उन्होंने वरदान दिया कि उस दिन जो भी व्यक्ति रक्षा सूत्र बांधा वह दीर्घायु और विजय दोनों को प्राप्त करेगा। इसके बाद से ही रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा शुरू हुई है देवी लक्ष्मी और राजा बलि के रक्षाबंधन के भाई बहन का राखी का त्यौहार मनाया जाता है।

       2:-   महाभारत में बताया गया है कि उस समय इंद्रप्रस्थ में शिशुपाल का वध करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र चलाया था तब चक्र से भगवान श्री कृष्ण की उंगली कट गई और खून निकला था ।  उस वक्त द्रोपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू  फाड़कर भगवान की उंगली पर लपेटकर बांध दिया और जिस दिन यह घटना घटी वह दिन भी श्रावण पूर्णिमा का था।
           भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया कि वह समय आने पर साड़ी के यह की एक-एक धागे का मोल चुकाएंगे और चीरहरण के समय भगवान ने इसी अपने दिए हुए वचन को निभाया था।

   3:-    महाभारत में रक्षाबंधन से जुड़ा हुआ युधिष्ठिर और श्री कृष्णा का भी एक प्रसंग का उल्लेख किया गया है । कहते हैं कि जब धर्मराज युधिष्ठिर कौरव से युद्ध करने जा रहे थे तब युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से प्रश्न  किया। कि वह इस युद्ध में विजय कैसे प्राप्त करें। तब श्री कृष्णा ने उन्हें सभी सैनिकों को रक्षा सूत्र बांधने को कहा।
          और बताया कि इस रक्षा सूत्र से व्यक्ति हर परेशानी से और हर मुसीबतों से मुक्ति पा सकता है। इसके बाद धर्मराज युधिष्ठिर ने वही किया जैसे कि श्री कृष्णा ने उन्हें बताया था ।और उस दिन युधिष्ठिर युद्ध में विजय प्राप्त की और सबसे महत्वपूर्ण बात की वह दिन भी जिस दिन युधिष्ठिर ने अपने सैनिकों को रक्षा सूत्र बांधा था। वह श्रावण पूर्णिमा का ही दिन था ।

                                  // धन्यवाद //

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