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गणपति बाप्पा की जन्म कथा ।।


                   गणपति बप्पा का जन्म कैसे हुआ?

माता पार्वती ने एक बार नंदी जो शिव के गन हैं उनकी आज्ञा का पालन करने में कुछ कमियों के कारण अपने शरीर के मैल और उत्तम से यह बालक बनाया और उसमें प्राण डाल दिए। और कहां, "तुम मेरे पुत्र हो, तुम्हें मेरी आज्ञा का पालन करना होगा। मैं स्नान के लिए जा रही हूं. ध्यान रहे कोई भी अंदर आने ना पाए।" कह कर माता पार्वती वहां से चली गई।

कुछ ही देर में वहां शंकर भगवान आए और सीधे पार्वती. के कक्ष में जाने लगे तब बालक ने उन्हें रोका पर भगवान शिव माने नहीं तो बालक ने उन्हें अंदर न जाने देने की जिद पकड़ ली बालक का हॉट देख भगवान शिव क्रोधित हुए और इस बालक हट को वह अपना अपमान समझ बैठे और त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर अंदर चले गए।

शिव की नाराजी देख पार्वती कारण ही नहीं समझ पाई और उन्होंने दो थाली में भोजन परोसा फिर शिव को भोजन के लिए आमंत्रित किए वहीं दूसरी थाली देख शिव ने आश्चर्य से पूछा, "यह दूसरी थाली किसके लिए है?" पार्वती बोली, "यह मेरे पुत्र गणेश के लिए है जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है आते वक्त आपने उसे नहीं देखा क्या?"



कथा कहानी में बताया है। कि भगवान शिव के ही कहने पर विष्णु ने यह हाथी के बच्चे का सिर काट के लाए थे. और उस बालक के धड़ से उस सिर को जोड़कर उसे जीवित किया था। फिर शिव के साथ अन्य देवताओं ने मिलकर उस गज मुखी बालक को अनेक आशीर्वाद दिए सभी देवताओं ने मिलकर उस बालक की स्तुति की और गणेश, गणपति, विनायक, विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य जैसे नाम उसे दिए गए।

यही कहानी है गणेश भगवान के अवतार की, पुराण के अनुसार शिव, पार्वती को पुत्र प्राप्ति की खबर सुनकर शनिदेव उनके घर आए वहां शनिदेव ने अपना सिर नीचे झुकाए खड़े थे। यह देख पार्वती ने उनसे सवाल किया "क्या आप मेरे बालक को नहीं देखेगे?"

सवाल सुनकर शनिदेव बोले "माते! में आपके सामने कुछ भी कहने योग्य नहीं हूं परंतु यह सब कर्मों का फल है। मैं बचपन से ही कृष्ण भक्त रहा हूं। मेरे पिता ने मेरा विवाह कर दिया वह सती, साध्वी, नारी छाया, बहुत तेजस्विनी, हमेशा तपस्या में लीन रहने वाली थी। एक दिन वह ऋतु स्नान के बाद मेरे पास आई। उस समय में ध्यान लगा रहा था। मुझे ब्रह्म ज्ञान नहीं था। उसने अपना ऋतुकाल असफल जानकर मुझे शाप दे डाला।

तुम्हा जिसकी तरफ भी दृष्टि करोगे वह नष्ट होगा। इसलिए मैं हिंसा अनिता के डर से आपके और बालक की तरफ नहीं देख रहा हूं यह बात सुनकर माता पार्वती के मन में जिज्ञासा हुई और उन्होंने शनिदेव से कहा आप मेरे बालक की तरफ देखिए तब शनिदेव बालक के सुंदर मुख को देखें देखा और उसी सनी दृष्टि से उस बालक का मस्तक आगे जाकर उसके शरीर से अलग हो गया यह देख सभी देवी देवता गंधर्व और शिव आश्चर्यचकित रह गए माता पार्वती रोने लगी।

देवताओं की प्रार्थना सुन श्रीहरि गरुड पर सवार होकर उत्तर दिशा में चले गए और वहां से यह हाथी का सिर ले आए सिर बालक के धड़ पर रखकर उसे जोड़ दिया तभी से भगवान गणेश गजमुख हो गए।

                                // धन्यवाद //


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