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Real Love Story !!


                     Real Love Story 

आज मेरा 10th का रिजल्ट आया था। मैं सेकंड डिवीजन में पास हुई थी। मेरे मम्मी- पापा बहुत खुश थे। आज पहली बार मेरे पापा ने मुझे पिक्चर देखने की इजाजत दी थी। यह उस समय की बात है। जब गांव में ब्लैक एंड व्हाइट टीवी चलती थी। वह भी कुछ गिने-चुने पैसे वालो के यहां ही टीवी होती थी। हमारे गांव में एक ही वीडियो हाल था। ₹2 टिकट लगती थी। हमारे मोहल्ले की महिलाएं और लड़कियां हर त्यौहार के दिन बड़े ही शौक से ₹2 लेकर वीडियो हाल में पिक्चर देखने जाया करती थी।

मेरे पापा बड़े ही सख्त मिजाज के थे। उन्हें इन सभी बातों से बहुत चिढ़ थी। अगर मैं कभी मोहल्ले के लड़कियों के साथ पिक्चर देखने चली जाती। तो घर आने के बाद मुझे जमकर पापा की डांट खानी पड़ती। फिर 2 दिन का मेरा दाना- पानी बंद हो जाता था ।आज मुझे मेरे पापा ने खुशी से कहा "जा बेटा" मैं खुशी-खुशी मुस्कुराते हुए, सहेलियों से बातें करते हुए। बड़ी गर्व से पिक्चर देखने जा रही थी।

आज मैं घुटने तक मिनी स्कर्ट, टॉप और ऊंची हील सैंडल पहनी थी। उस दिन मैं खुशी से गुलाब की तरह खिल रही थी। और थोड़ा प्राऊड फील कर रही थी। शाम के 6:00 से 9:00 का शो था। तो हम ठीक 5:00 बजे घर से निकले और कुछ तीन से चार मोहल्ले पार हुए थे। यानी कि ठीक बीचोबीच पहुंचे थे। मतलब जितना दूर हम आए थे उतना ही दूर और जाना था।

हम सब मस्त अपनी धुन में चले जा रहे थे कि, मेरे कानों को चीरते हुए हवा की लहर ने कहा "आई लव यू संध्या" मैं जगह पर ही रुकी और अपनी चारों तरफ घूम कर देखी। यह किसकी आवाज़ है। हम सभी ने आवाज सुनी मगर आश्चर्य। किस ने कहा यह हम, में से किसी ने नहीं देखा। हम आगे चल पड़े मेरे पैर आगे बढ़ रहे थे पर मन वहीं रुक गया था। जैसे वह वक्त ही मेरे लिए वहीं ठहर गया हो। मुझे खुद नहीं पता कि क्या हुआ था मुझे।

मैं अपने होश में नहीं थी मुझे बार-बार वही स्वर सुनाई दे रहा था। और मेरा दिल उसे ढूंढ रहा था। हम वीडियो हाल में पहुंचे अपनी टिकट ली और पिक्चर भी शुरू हो गई। लेकिन मेरा मन उस हाल मैं था ही नहीं। मेरा मन अब भी उस स्वर के आस-पास ही भटक रहा था। पिक्चर खत्म हुई हम घर आए। दूसरे दिन मैं अपनी क्लासमेट सहेली सिंधु के घर गई हम कुछ देर बातें किए चाय, नाश्ता हुआ। फिर वह मुझे छोड़ने बाहर आई हम एक दूसरे को बाय कर रहे थे। कि तभी बगल वाले घर से कोई लड़का बाहर आया। मैं उसे नहीं जानती थी। उसने सिंधु को कहा "इतनी जल्दी मेहमान को रवाना कर रही है क्या?"

आवाज सुनते ही मेरे कान खड़े हो गए। यह आवाज वही थी जो रात में मैंने सुनी थी। पर मैंने उस वक्त उसे देखा नहीं था। इसलिए दिमाग से शोर नहीं थी। लेकिन मेरे दिल की धड़कन ने मुझसे धड़कते हुए कहा। "यही है वो" पता नहीं क्यों? पर मैं थोड़ा शरमा गई और बिना कुछ बोले चुपके से एक नजर उसकी तरफ देखकर वहां से निकल गई। अब मैं हर समय उसी के बारे में सोचने लगी। मैं उसकी एक झलक पाने के लिए तड़प रही थी। सिंधु मेरी बहुत अच्छी और करीबी सहेली थी। पर उसे क्या? कहूं, कैसे? कहूं। मेरी समझ से बाहर था।

फिर 1 दिन सिंधु मेरे घर आई। हमारा रोज मिलना नहीं होता था। क्योंकि हम दोनों सहेलियों के घर बहुत दूर थे। हमने इधर-उधर की बातें कि मेरा मन खुशी से उछल उछल कर बोल रहा था कि, सिंधु को अपने दिल की बात बता दूं। मैंने हिम्मत जुटाई और उसे बता दिया। वह पागल इतनी खुश हुई मेरी बात सुनकर और कहने लगी "मैं अभी घर जाकर बात करती हूं। अगर यह वही है तो तू बड़ी खुश किस्मत है। राज बहुत बहुत अच्छा लड़का है।और तेरे लिए परफेक्ट है।"

मैं शरमा गई और उसे गले लगा ली। सिंधु अपने घर गई पर मेरी बेचैनी बढ़ने लगी। मुझे डर भी लग रहा था कि, कहीं वह मुझे ही गलत ना समझ बैठे। उस रात मुझे नींद नहीं आई। सुबह भी किसी काम में मन ही नहीं लग रहा था। सोचा मैं सिंधु को जाकर मिलूं और पता करूं कि क्या? कहा उसने। नहीं कहा होगा तो। मैं इसी उधेड़बुन में थी।

      प्यार हुआ इकरार हुआ है।
      प्यार से फिर क्यों?       डरता है दिल।
      कहता है दिल। रस्ता मुश्किल।
       मालूम नहीं है। कहां मंजिल।

सिंधु मेरे घर आई उसने मुझे बताया कि उसका नाम राज है। वह हमारे ही स्कूल से ट्वेल्थ पास किया है। इसी वर्ष और वह पहले से मुझे जानता था और पसंद भी करता था। उसके पापा फॉरेस्ट गार्ड थे, तो सरकारी क्वार्टर में रहते थे। चार-पांच माह पहले ही उसके पापा की डेथ होने की वजह से उन लोगों को सरकारी क्वार्टर खाली कर। इस किराए के घर में रहने आना पड़ा था। अभी दो माह ही हुए थे उन्हें यहां शिफ्ट हुए।

उसने यह भी स्वीकार किया। उस दिन "आई लव यू" कहने वाला वही था। उसने कहा कि वहीं पास में बरगद के पेड़ के पीछे मैं छिप गया था। यह सुनकर मैं फूली नहीं समा रही थी। मैं सिंदू को ही कसकर पकड़ी और पता नहीं कितनी बार उसके गाल चूमी। अब मेरे पैर धरती पर रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। ऐसे लग रहा था जैसे सारा संसार मेरे साथ नाच रहा हो, झूम रहा हो। मैं अपनी खुशी कैसे बयां करूं किस किस को बताओ कि मुझे प्यार हुआ है। आगे कल....

                        ।।। धन्यवाद ।।।

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